- महाशिवरात्रि से पहले महाकाल दरबार में अंतरराष्ट्रीय पुष्प सज्जा की शुरुआत: 40 से अधिक विदेशी फूलों से सजेगा परिसर; बेंगलुरु से आए 200+ कलाकार तैयारियों में जुटे
- उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के विशेष पूजा-विधि: स्वस्ति वाचन के साथ खुले पट, राजा स्वरूप में सजा दरबार
- महाशिवरात्रि से पहले उज्जैन में हाई अलर्ट: देवास गेट से रेलवे स्टेशन तक संयुक्त सर्च ऑपरेशन, 100 पुलिसकर्मी पांच टीमों में तैनात
- महाशिवरात्रि पर महाकाल दर्शन के लिए डिजिटल कंट्रोल रूम, गूगल मैप से तय होगा आपका रास्ता: जाम लगते ही मैप से गायब होगा रूट, खाली पार्किंग की ओर मोड़ दिया जाएगा ट्रैफिक
- महाकाल मंदिर में अलसुबह भस्मारती की परंपरा, वीरभद्र के स्वस्तिवाचन के बाद खुले चांदी के पट; पंचामृत अभिषेक और राजा स्वरूप में हुआ दिव्य श्रृंगार
महाकाल की पहली सवारी निकली:कार्तिक माह में नगर भ्रमण कर मंदिर लौटे महाकाल
उज्जैन के राजा महाकाल समय-समय पर अपने भक्तों का हाल जानने नगर भ्रमण कर मंदिर लौट आए। सावन भादौ माह, दशहरा पर्व व दीपावली के बाद आज कार्तिक अगहन माह में बाबा महाकाल ठीक शाम 4 बजे मंदिर प्रांगण से शाही ठाठ बाट के साथ भक्तों का हाल जानकर वापस मंदिर लौट आए।
कोविड के नियमों के चलते विगत 2 वर्षों से बनाए गए नए रुट पर बाबा महाकाल मंदिर से बड़ा गणेश, नृसिंहः घाट होते हुए शिप्रा घाट पहुंची, जहां उनका पूजन अभिषेक किया गया।
जिसके बाद बाबा क्षिप्रा के राम घाट से रामानुजकोट आश्रम, हरिसिद्धि माता मंदिर होते हुए बड़ा गणेश व अंत में महाकाल मंदिर लौटी।
सवारी के पहले मंदिर प्रांगण में महाकाल का पूजन व अभिषेक मंदिर प्रशासक गणेश धाकड़ ने किया। आरती के बाद मंदिर प्रांगण से महाकाल की सवारी निकली।
मंदिर के मुख्य गेट पर सबसे पहले बाबा को पुलिस बल द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। कार्तिक माह में निकलने वाली सवारी के लिए भक्तों पर प्रतिबंध नहीं होने के चलते इस बार भक्तों को सवारी के दर्शन करने का लाभ मिला। मंदिर के पुजारी दिनेश गुरु ने बताया कि बाबा की पालकी मंदिर से शिप्रा नदी तक पहुंचेगी व वहां बाबा का पूजन अभिषेक कर पालकी में ही मंदिर लाया गया।